यह बात किसी से छिपी नहीं है कि देश पानी के भयानक संकट से जूझ रहा है . करीब 6 महीने बाद दिल्ली, बेंगलुरू समेत देश के 21 शहरों में भूमिगत जल लगभग ख़त्म हो जाएगा. चेन्नई में जल संकट ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया है कि यहां पानी के लिए टोकन मिल रहे हैं. IT कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं. ज़्यादातर छोटे रेस्टोरेंट बंद हैं, मॉल्स में वॉशरूम लॉक हो चुके हैं. लोग पीने का पानी खरीद रहे हैं. कपड़े और बर्तन धोना एक लग्जरी के जैसा हो गया है.

वर्षा जल संचयन(Rainwater Harvesting) के बावजूद चेन्नई के लोग पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं.

महाराष्ट्र हर साल की तरह सूखे की मार झेल रहा है और यहां कई एकड़ फसल, पानी के अभाव में सूख गई हैं. राज्य सभा में देश के जल संकट को लेकर वाद-विवाद चल रहा था. Maadhyam नामक ट्विटर हैंडल ने चर्चा के दौरान की राज्य सभा की तस्वीर शेयर की.

तस्वीर देखकर आम लोगों की प्रतिक्रिया-

राज्य सभा की खाली सीटें चीख-चीखकर कह रही थी कि इन लोगों को पानी की समस्या नहीं झेलनी पड़ रही. ये तस्वीर बताती है कि हमारे राज्य सभा के सदस्य जल संकट जैसे गंभीर विषय को लेकर कितने चिंतत हैं!

थोड़ी देर हुई चर्चा में सीपीआई(एम) के टी.के.रंगराजन ने कहा कि विश्व का 6वां सबसे बड़ा शहर चेन्नई देश का पहला शहर है जो सूख चुका है.


केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत ने ये आश्वासन दिया है कि 2024 तक हर घर में साफ़ी पीने का पानी होगा. हमारा सवाल ये है कि जब धरती से ही पानी ख़त्म होगा तो वो पानी कहां से देंगे?