'तू मेरी बंदी होकर किसी और से बात करे ये मैं हरगिज़ बर्दाश्त नहीं कर सकता.'


'तू सिर्फ़ मेरे साथ ही घूमेगी'

'तू अगर मेरी नहीं हो सकती तो किसी और की भी नहीं हो सकती'

'मैं तुम्हें भूल जाऊं ये हो नहीं सकता और तुम मुझे भूल जाओ ये मैं होने नहीं दूंगा.'

जानी-पहचानी लग रही होंगी न ये बातें. किसी फ़िल्म में, सीरियल में या किसी कहानी में सुनी ही होंगी. या फिर हो सकता है ये बातें आपसे कही गईं हो या आपने किसी से कहीं हों...


कुछ लोगों को ये बातें सुनकर/पढ़कर अच्छा महसूस हो सकता है, ये कुछ लोगों के प्रेम जताने का तरीका भी हो सकता है पर ऐसी बातें लोगों की ज़िन्दगी तबाह करने की ताकत रखती है.

पीछा करने और हां को न समझने जैसे प्रेम की संस्कृति को, सिनेमा जगत की कुछ धुरंधर फ़िल्मों ने जन्म दिया है. लेकिन उस वजह से कई मासूम ज़िन्दगियां बर्बाद हो गई हैं.

Source: Womens Health

Stalking की वजह से आज तक देश में कई महिलाओं/लड़कियों की जान जा चुकी है. Stalking को ख़याली पुलाव मानने वालों के लिए हमने अपने एक लेख में कई सुबूत दिए थे.


इस Stalking की वजह से आज मुंबई की एक लड़की ज़िन्दगी और मौत के बीच झूल रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी गोरेगांव में एक 16 साल के लड़के ने 13 साल की लड़की को छत से फेंक दिया और फेंकने से पहले कहा, 'अगर तुम मेरी नहीं हो सकती तो किसी की नहीं हो सकती'. लड़की की मौत हो गई है. यही नहीं, लड़के के माता-पिता ने सबूत भी मिटाने की कोशिश की. लड़के और लड़की के बीच में दोस्ती थी पर जब लड़की की मां ने दोस्ती तोड़ने को कहा तो लड़की ने उससे बातचीत बंद कर दी और यही लड़के के 'Ego' पर लग गई.

Source: Hindustan Times

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़के ने वही डायलॉग लड़की को मॉल के सामने भी कहा था, जहां वो किसी दोस्त के साथ थी. लड़की ने अपने माता-पिता को बताया पर उन्होंने शिकायत करना ज़रूरी नहीं समझा.


सोचिए, 16 साल, इतनी छोटी सी उम्र में एक लड़का किसी की हत्या करने पर आमादा हो जाता है वो भी सिर्फ़ इसलिए क्योंकि लड़की ने उससे बातचीत बंद करने की बात कह दी थी.

क्या कारण हो सकते हैं?

फ़िल्में, फ़िल्में और फ़िल्में

बॉलीवुड की कई फ़िल्मों ने प्रेम जैसे पाक एहसास की धज्जियां उड़ा दी हैं. चाहे वो कभी ख़ुशी कभी ग़म के राहुल-अंजली का प्यार हो या कबीर सिंह में कबीर-प्रीति का रिश्ता हो. कभी ख़ुशी कभी ग़म में राहुल के गाल पर किस करने की बात को बेहद सहजता से दिखाया गया है पर यहां कन्सेंट की बात ही नहीं कही गई है. कबीर-प्रीति के रिश्ते में वॉयलेंस तक दिखा दिया गया और फ़िल्म निर्देशक के अनुसार जिस प्रेम में मार-पीट नहीं वो प्रेम ही नहीं. रांझणा में कुंदन द्वारा ज़ोया का पीछा किया जाना और ज़ोया द्वारा उसे थप्पड़ मारने पर भी उसका कोशिशें करते रहने पर दर्शकों ने ख़ूब तालियां पीटीं.


निर्मता-निर्देश, लेखक को अपनी क्रिएटिविटी दिखाने की पूरी स्वतंत्रता है और होनी भी चाहिए पर वो कई बार इस बात को नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि उनकी 'क्रिएटिविटी' किसी के दिमाग़ पर किस कदर हावी हो सकती है.

Source: Style whack

'Misguide' करने वाले दोस्त

Stalk करो, लड़की पट जाएगी, उसकी ना में भी हां होती है ये सब फ़िल्मों सिर्फ़ फ़िल्मों की ही देन नहीं है. हम जहां रहते हैं उसके आस-पास का माहौल, हमारे यार-दोस्त भी इस तरह की भावनाओं में काफ़ी अहम भूमिका निभाते हैं. मुंबई वाले केस में ही देख सकते हैं, माता-पिता बेटे को पुलिस के पास ले जा सकते थे पर उन्होंने सबूत मिटाना ज़्यादा ज़रूरी समझा.


'देख देख वो तुझे ही देख रही है'

'उसने तुझे नोट्स दिए बे, वो पसंद करती है तुझे!'

ऐसा कहकर दिमाग़ में प्रेम बीज बोते है कई यार-दोस्त, फिर चाहे लड़की ने बिना कुछ सोचे ही, अनजाने ही किसी की मदद क्यों न की हो, उसका कन्सेंट मायने नहीं रखता.

Source: The Businesswoman Media

Ego

'उसने मुझे मना कैसे किया' वाला Attitude हमारे देश में काफ़ी सारे पुरुषों के मन में है, चाहे वो किसी भी आयुवर्ग का क्यों न हो? इस तरह के विचारों के लिए और कोई नहीं, माता-पिता ही ज़िम्मेदार हैं. बच्चे जैसा घर में देखते हैं उनके दिमाग़ में इसका गहरा असर पड़ता है.

शिकायतें न करने की भारतीयों की आदत

मुंबई वाली घटना का ही उदाहरण ले लेते हैं, अगर लड़की के माता-पिता ने कोई सख़्त कदम उठाया होता तो शायद लड़की की ज़िन्दा होती. रिपोर्ट्स के मुताबिक लड़की के पिता ने लड़के के पिता से बात की थी. मगर शायद इससे ज़्यादा गंभीर कदम उठाने की ज़रूरत थी.

Source: Jfw Online

वक्टिम/सरवाइवर की ग़लती निकालना और दोषी की ग़लती छिपाना

ये तो जैसे भारतीयों की हॉबीज़ में से है. चाहे वो छेड़छाड़ का मामला हो या रेप का, लड़कियों पर उंगली उठाने वालों की कमी नहीं है.


मुंबई की घटना में अपराधी लड़के के माता-पिता ने उसे समझाना ज़रूरी नहीं समझा और इस वजह से एक परिवार की ख़ुशियां उजड़ गईं.

एक सवाल करना चाहूंगी, कुछ लोगों के Ego, बददिमाग़ी के कारण कब तक लड़कियां अपनी जान गंवाती रहेंगी?