मंडे यूं तो बोरिंग होते हैं, लेकिन अगर किसी फ़िल्म का ट्रेलर आ जाए तो दिन बेहतर हो जाता है. सोमवार, 1 जुलाई लेकर आया 'जबरिया जोड़ी' का ट्रेलर. ट्रेलर आया और शाम तक ट्विटर पर ट्रेंड भी करने लगा. इस फ़िल्म में जाने-माने कलाकार सिद्धार्थ मल्होत्रा, परिणीति चोपड़ा, संजय मिश्रा, जावेद जाफ़री, अपारशक्ति ख़ुराना नज़र आने वाले हैं. हालांकि इस फ़िल्म के ट्रेलर को देखकर मुझे चिंताएं ज्यादा हुईं!

मैंने सोशल मीडिया पर इस फ़िल्म से जुड़ी बातें पहले ही पढ़ ली थीं और ट्रेलर देखकर साफ़ हो गया कि ये फ़िल्म 'पकड़वा बियाह' या 'जबरन शादी' पर बनाई गई है.


चंद ही पलों में कई घटनाएं दिमाग़ में बिजली की तरह कौंध गईं. बचपन से ही 'पकड़वा बियाह' की कई घटनाएं सुनती आई हूं. मेरे कई दोस्तों के घर में ऐसी शादियां हुईं हैं. मेरे एक बहुत ही क़रीबी दोस्त के साथ बचपन में ऐसा ही हुआ था.

Source: Live Bihar

घटना कुछ यूं थी-

'मै 10वीं में था. 8 बजे के आस-पास मैं ट्यूशन से लौट रहा था. सर्दियों का मौसम था तो रास्ते लगभग सुनसान थे. अचानक 2 बाइक वालों ने मेरा रास्ता रोका. एक ने बाइक मेरे आगे रोकी और एक ने बगल में. एक बाइक सवार ने मुझसे कहीं का पता पूछा, मैंने उसे बताना शुरू ही किया था कि दूसरे ने देसी बंदूक निकालकर बाइक पर बैठने की धमकी दी. मैंने साईकिल फेंकी और रोड के किनारे कूद गया, वो शायद कोई सूखा तालाब था. अंधेरे में मैं सिर्फ़ भागता गया और किसी के बगीचे में घुस गया, जिनका वो बगीचा था उन्होंने मुझे घर बुलाया और बैठाया. वो मेरी साईकिल भी ले आया और मुझे घर छोड़ा. अगले दिन सुबह मुझे पता चला कि वो बाइकसवार मेरी जबरन शादी करवाने के लिए मुझे किडनैप करने आए थे.'

पढ़ने में आपको कुछ महसूस हुआ हो या नहीं पता नहीं पर एक 10वीं में पढ़ने वाले बच्चे की मन:स्थिति के बारे में सोचिए. क्या उम्र होती है 10वीं में 14-15 साल? अंधेरी रात, सुनसान सड़क और बंदूक का डर... इन सबसे भाग पाना आसान नहीं. आमतौर पर ऐसे हालात में लोगों का दिमाग़ काम करना बंद कर देता है, जान छुड़ाकर भागना तो दूर की बात है. आज मेरा वो दोस्त इंजीनियर है, अगर उस रात वो वहां से भाग नहीं पाता तो शायद वो ज़िन्दगी में इतना आगे नहीं बढ़ पाता.

'पकड़वा बियाह', बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों की एक कुरीति है, जो सालों से चली आ रही है. आंकड़ों की बात करें तो 2013 में 2,529, 2014 में 2,533, 2015 में 3,001 और 2016 में 3,075 पुरुषों की ज़बरदस्ती शादी करवाई गईं. 2017 में मार्च तक 830 पुरुषों को किडनैप कर जबरन विवाह के बंधन में बांधा गया था.

'तलाक़शुदा' की टिप्पणी न लेने के लिए कई जोड़ियां इस विवाह को अपनाकर ज़िन्दगी में आगे बढ़ जाते हैं, पर ये एक समझौता ही है न? आज के समय में यक़ीन करना मुश्किल है कि ऐसा भी कुछ होता है. पर बोकारो स्टील प्लांट के कर्मचारी का ये वीडियो आपको याद होगा.

हां तो 'जबरिया जोड़ी' इसी सामाजिक कुरीति पर बनाई जा रही है. फ़िल्म का ट्रेलर देखकर तो पहली नज़र में मुझे यही महसूस हुआ कि इतने संवेदनशील विषय को एक बेहद मज़ाकिया एंगल दिया गया है. फ़िल्म रिलीज़ होने से पहले कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी. पर इस तस्वीर ने भी मेरे मन को अभी से नाखुश कर दिया है.

Source: Pinkvilla

बॉलीवुड ने पहले कई ऐसी फ़िल्में बनाई हैं जो आपको थिएटर में भरपूर हंसाती हैं. उनका अंदाज़ भी हल्का-फुल्का रहा है. लेकिन फ़िल्म ने इस सब के बीच विषय की पूरी गरिमा बनाए रखी और आखिर में एक ऐसा संदेश दिया जो लोगों को याद भी रहा. इनमें कुछ शानदार फ़िल्में जैसे, बधाई हो, विक्की डोनर और शुभ मंगल सावधान शामिल हैं. इनमें 'Late Preganancy', 'Sperm Donation'और 'Erectile Dysfunction' जैसे विषयों पर बड़ी सहजता से बात की गई है. मेरी अंतरात्मा की यही आवाज़ है कि जबरिया जोड़ी भी कुछ ऐसा ही करे और 'पकड़वा बियाह' जैसी कुरीति का मज़ाक बनाकर न छोड़ दे.

अगर आप इस कुरीति पर कोई अच्छी फ़िल्म देखना चाहते हैं तो 'अंतरद्वंद' देखिए. ट्रेलर ये रहा-