अगर इस देश के सवा सौ करोड़ देशवासियों से पूछा जाए, ठंडा मतलब ????

तो 99.9% लोगों का एक ही जवाब आएगा, कोका कोला.

और शायद आपके मन में भी यही जवाब आया हो.

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मैं कोका कोला के बारे में आपको ज्ञान बांटने नहीं जा रहा.

राहत की एक लंबी सांस लीजिए और एक बात बताइए कि 'ठंडा मतलब' सुनकर मन में कोई दूसरी चीज़ जैसे कि लस्सी, शरबत, जूस या बर्फ़ का ख़्याल क्यों नहीं आया?

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जानते हैं ऐसा क्यों होता है?

क्या हुआ? नहीं समझे. कोई बात नहीं. हम हैं ना.

Consumer Marketing की शब्दावली में इसे Brand Recall Value कहते हैं. मतलब कि एक चीज़ को दूसरे के साथ ऐसा जोड़ देना कि ख़रीदने वाला कुछ और सोच ही न पाये. और इसी मक़सद को पूरा करने के लिए होता है विज्ञापन, प्रचार-प्रसार.

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इसी प्रचार की वजह से अधिकतर भारतीय (यहां Consumer पढ़ें) डिटर्जेंट को सर्फ़ (जो कि एक ब्रैंड है) और दंतमंजन को कोलगेट कहते हैं. यही वजह है कि आज तक Maggi को कोई इंस्टेंट नूडल नहीं कह पाया, बल्कि Maggi ही कहता है. ये ब्रैंड Recall की वजह से हुआ है कि लोग एक प्रोडक्ट को उसके ब्रैंड नेम से जानने लगते हैं.

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Consumer Marketing पहले बाज़ार तक ही सीमित था. यानी इस फ़ंडे के ज़रिये आपको सामान बेचे जाते थे.

मगर इस फ़ंडे का उपयोग अब चुनाव में हो रहा है. मक़सद वही है - कि आपको सामने वाला प्रोडक्ट, अमां माफ़ी चाहेंगे, सामने वाला नेता छोड़कर कोई और दिमाग में ही न आए.

ऐसे ही कई ब्रैंड इलेक्शन में भी खड़े हुए हैं. इनकी अपनी-अपनी Recall Value है. जैसे 'मंदिर वहीं बनेगा', 'आएगा तो मोदी ही', 'चौकीदार ही चोर है'.

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इस काम के लिए करोड़ों रुपए विज्ञापन पर बहाए जा रहें हैं. टीवी, रेडियो, फ़ेसबुक, समाचार पत्र कोई जगह नहीं छोड़ी है हमारे ‘प्रिय’ नेताओं ने.

अभी तक आप खेल समझ गए होंगे और ये भी कि इलेक्शन में नेता को वोट दीजिये, ब्रैंड को नहीं.

नेता स्मार्ट हो रहे हैं, तो आप भी स्मार्ट बनिए.