चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू के बाद अब जयपुर में भी पानी की समस्या मुंह बाए खड़ी है. राजस्थान के Public Health Engineering Department के अनुसार, वहां के जलाशयों में अगले एक महीने तक का ही पीने का पानी बचा है. जल विभाग अब इससे निपटने के लिए दो दिन में एक बार वाटर सप्लाई करने का प्लान बना रहा है.

दरअसल, मानसून की बेरुखी के चलते जयपुर के जलाशय लगातार सूखते जा रहे हैं. शहर को बीसलपुर बांध से पानी की आपूर्ति की जाती है. इसके जलभराव क्षेत्र में बारिश नहीं हुई जिसके चलते यहां पर 64.93 क्यूसेक लीटर पानी ही बचा है. ये इसकी क्षमता का मात्र 5 फ़ीसदी है. इससे शहर में 31 अगस्त तक ही पानी की सप्लाई की जा सकती है.

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जल विभाग का कहना है कि अगर शहर में जल्द बारिश नहीं हुई, तो ये पानी उससे पहले भी ख़त्म हो सकता है. इस साल जयपुर में सिर्फ़ 116 मिलीमीटर बारिश ही हुई है, जबकि पिछले साल जुलाई में 225 मिलीमीटर वर्षा हुई थी. बीसलपुर बांध से अजमेर, टोंक और नागौर ज़िले को भी पीने का पानी पहुंचाया जाता है. मतलब इनके ऊपर भी जल संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

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रिपोर्ट्स के अनुसार, PHED ने जयपुर को की जाने वाली पानी की आपूर्ति में फ़िलहाल 30 फ़ीसदी की कटौती कर दी है. अगर हालात नहीं सुधरे तो इस कटौती में इज़ाफा किया जा सकता है. वहीं अधिकारियों को उम्मीद है कि अगस्त में अच्छी बारिश होगी, तो स्थिति काबू में आ जाएगी. राज्य के मौसम विभाग के अनुसार, राजस्थान में 28 जुलाई से भारी वर्षा होने के आसार हैं.

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हालांकि, पूरा देश इन दिनों पानी की किल्लत का सामना कर रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण ग्राउंड वाटर का अनियंत्रित रूप से इस्तेमाल किया जाना है. इस साल कई राज्यों में कम बारिश होने के कारण जल संकट से मानसून के दिनों में भी जूझना पड़ रहा है.

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देश में लगातार बढ़ते जल संकट की समस्या हमारे लिए ख़तरे की घंटी है. हमें जल्द से जल्द इस समस्या का हल निकालना होगा. इसका सबसे आसान तरीका वर्षा जल को संरक्षित करना है.