क्रिकेट एक ऐसा खेल जिसमें शायद सबसे ज़्यादा कप्तान की भूमिका होती है. टीम की जीत और हार दोनों का ज़िम्मेदार कप्तान ही होता है. भारत में तो कप्तान बनना शेर की सवारी जैसा है. आपको शायद मेरी लिखी बात अजीब लगी हो और आपके तर्क शायद अलग हों, लेकिन क्रिकेट के कप्तानों के हटने का कारण आपको सोचने पर मजबूर कर देगा कि क्या सच में क्रिकेट के कप्तानों के साथ सही बर्ताव किया गया है या नहीं. वैसे तो भारतीय क्रिकेट टीम में आज तक 34 टेस्ट, 26 वनडे और 7 टी-20 कप्तान रहे हैं. लेकिन हम बात उन कप्तानों की करेंगे, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम की कमान लम्बे अंतराल तक संभाली और उनकी गिनती सफल कप्तानों में भी होती है. लेकिन कप्तान के पद से हटाने के फ़ैसले कई सवाल खड़े कर गए.

1. मनसूर अली खां पटौदी

माना जाता है कि मनसूर अली खां पटौदी ने भारतीय क्रिकेट को अग्रेसिव क्रिकेट खेलना और जीतना सिखाया. भारत को इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहली टेस्ट सीरीज़ जिता कर अपनी कप्तानी का लोहा मनवाया इतना ही नहीं, पटौदी पहले कप्तान बने जिनकी कप्तानी में भारत ने पहली बार विदेशी धरती पर टेस्ट मैच में जीत दर्ज की. लेकिन 21 साल की उम्र में बने कप्तान पटौदी को महज कुछ सीरीज़ में रन नहीं कर पाने की वजह से दबाव बनाया गया और उन्होंने ख़ुद कप्तानी को अलविदा कह दिया, इतना ही नहीं, उन्होंने क्रिकेट को भी अलविदा कह दिया.

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2. सुनील गवास्कर

इस नाम को पूरा विश्व जानता है, भारत में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन ने भी इनको देख कर ही क्रिकेट खेलना शुरू किया था. सुनील गवास्कर को भी भारतीय टीम की कमान मिली, लेकिन अच्छी कप्तानी और बल्लेबाजी के बावजूद उनसे कई बार कप्तानी छीन ली गई. कहा जाता है कि गवास्कर के बर्ताव के कारण उनकी कपिल देव और कुछ खिलाड़ियों से कभी नहीं बनी.

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3. कपिल देव

देश में आज क्रिकेट जहां भी है, इसमें कपिल देव का बहुत बड़ा रोल रहा है. 1983 वर्ल्ड कप की जीत ने देश में क्रिकेट का ऐसा जादू चलाया, जो आज भी नहीं गया है. लेकिन कपिल देव को भी वर्ल्ड कप जीत के बाद औऱ गवास्कर के साथ बर्ताव के कारण कप्तानी से हटा दिया गया था और इसके बाद कपिल देव बिना कप्तानी किए हुए भी भारतीय टीम का हिस्सा रहे.

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मोहमम्द अजहरुद्दीन

मैच फ़िक्सिंग के कारण टीम से बाहर हुए मोहमम्द अज़हरूद्दीन को कोर्ट ने फ़िक्सिंग के बैन से बरी कर दिया, लेकिन उसके बाद वो कभी भी भारतीय टीम का हिस्सा नहीं बन पाए. अज़हर ने 99 टेस्ट मैच खेले थे, लेकिन 100वें टेस्ट को खेलने का उनका सपना कभी पूरा नहीं हो पाया.

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सौरव गांगुली

देश का एक ऐसा कप्तान जो जिसने न सिर्फ टीम को जीतना सिखाया, बल्कि सामने वाली टीम को उन्ही की भाषा में जवाब भी देना सिखाया. लेकिन कमबैक किंग के नाम से पहचाने वाले गांगुली को भी कप्तानी से हटाया गया, कारण बताया गया उनकी ख़राब फ़ॉर्म. लेकिन उनके आंकड़ों पर ग़ौर किया जाए, तो उनका ऐवरेज कभी भी 40 से नीचे नहीं आया. डालमिया औऱ पवार की पॉलिटिक्स मे फंसे गांगुली को हटाने में ग्रेग चैपल से आग में घी जैसा काम किया और एक बार फिर एक अच्छा कप्तान पॉलिटिक्स की भेंट चढ़ गया.

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महेंद्र सिंह धोनी

महेंद्र सिंह धोनी देश के सबसे सफल कप्तान, आईसीसी की हर ट्रॉफ़ी जिसने पास हो, आईपील में जिनकी तूती बोलती हो, टेस्ट वनडे और टी20 में जिसने टीम को नंबर वन बनाया, उसकी विदाई ऐसी होगी किसी ने सोचा नही था. कहा जाता है कि इनकी टेस्ट की कप्तानी छोड़ने में आईपीएल में फ़िंक्सिंग का एक बहुत बड़ा रोल रहा. जिसमें उनकी टीम चेन्नई सुपर किंग्स को भी बाहर रहना पड़ा था. लेकिन सबसे सफल कप्तान का फिक्सिंग में नाम नहीं आया, लेकिन बलि मेहंद्र सिंह धोनी की ही चढ़ी.  

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विराट कोहली

दुनिया का सबसे बेहतरीन खिलाड़ी, जिसके नाम से गेंदबाज़ों की हवाईयां उड़ जाती है, उसे कप्तानी से इस तरह हटाया जाएगा किसी ने नहीं सोचा था. कोहली की फ़ॉर्म की बात करने वालों ने शायद उनका ऐवरेज नहीं देखा. टीम का अच्छा प्रदर्शन ,सिर्फ कप्तान पर निर्भर नहीं करता बल्कि बचे 10 खिलाड़ियों पर भी करता है. लेकिन जैसा मैंने पहले कहा कि इस खेल में जीत और हार दोनों कप्तान की होती तो इस बार भी विराट को टीम की कप्तानी से हटा कर एक बार फिर बीसीसीआई ने साबित किया कि खेल से बड़ा खिलाड़ी नहीं हो सकता

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ये भारत के महान कप्तान हैं, जिनका रोल कभी भी नहीं हटाया जा सकता, वजह कोई भी हो, ये वो कप्तान हैं, जिनकी वजह से दुनियाभर में भारत को क्रिकेट और क्रिकेट को भारत की तरह देखा जाता है.