भारत के बल्लेबाज़ों का बोलबाला पूरे विश्व में हमेशा से रहा. गावस्कर, सचिन, द्रविड़, कोहली, रोहित जैसे बल्लेबाज़ों की लिस्ट बहुत बड़ी है. लेकिन जब भी गेंदबाज़ों का नाम आता है, तो भारत की ये लिस्ट काफ़ी छोटी हो जाती है और बीता 10 साल इस लिस्ट से हटा दिया जाए, तो ये लिस्ट और छोटी हो जाती है. ऐसा नहीं है कि उस दौर में भारत के पास तेज़ गेंदबाज़ नहीं थे, लेकिन वो खिलाड़ी आते तो थे टीम में आंधी की तरह, लेकिन तूफ़ान की तरह तुरंत लौट भी जाते थे. तो चलिए उन गेंदबाज़ों को याद करते हैं, जिनके चर्चे तो बहुत हुए लेकिन वो कभी बड़ी खब़र नहीं बन पाए.

1. देबाशिष मोहंती

अपने छोटे से करियर में मोहंती ने कई बार शानदार गेंदबाज़ी की. अपने अनोखे एक्शन की वजह से उन्हें लोग बख़ूबी जानते थे. 1999 वर्ल्ड कप का लोगो इनके एक्शन से ही बनाया गया था. अपने करियर में खेल 47 अंतरराष्ट्रीय मैचों में उन्होंने 57 विकेट लिए. जिसके साथ ही उनका करियर ख़त्म हो गया.

Mohanti
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2. अभय कुरुविला

मात्र एक साल के छोटे से करियर में अभय ने 50 विकेट लिए थे. ये उनका करियर रिकॉर्ड है.अभय को उनकी गेंदबाज़ी से ज़्यादा उनकी लंबाई के लिए जाना जाता है. कुरुविला के करियर की सबसे ख़ास बात ये थी इनकी डेब्यू 1997 में हुआ और एक साल में ही इनको टीम से बाहर कर दिया गया था. फ़िटनेस और गेंदबाज़ी दोनों ही बड़ी समस्या रही थी इस खिलाड़ी के लिए.

Abhay
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3. प्रज्ञान ओझा-

भारतीय टीम को मुरली कार्तिक के बाद एक अच्छा बाएं हाथ का स्पिन गेंदबाज़ की ज़रूरत थी, प्रज्ञान ओक्षा का नाम सामने आया. अपने इंटरनेशनल करियर की पहली ही गेंद पर विकेट लेने वाले प्रज्ञान का करियर भी तेज़ी से ख़त्म हुआ. उन्हें मिले मौक़ों को वो इस्तेमाल नहीं कर पाए और टीम इंडिया से बाहर का रास्ता उन्हें देखना पड़ा

Pragyan
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4. प्रदीप सांगवान

इस खिलाड़ी को अंडर 19 के वक़्त से फ़ेम मिल चुका था. बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ ने डॉमेस्टिक सर्किट में विकेटों की झड़ी लगा दी थी. भारतीय टीम में आने का बस मौक़ा तलाश रहे थे. मौक़ा मिला, लेकिन सांगवान उस मौक़े को भुना नहीं पाए और फ़ेल हो गए. उनकी प्रतिभा को देख कर उन्हें कई मौक़े भी दिए गए, लेकिन उसका कोई फ़ायदा वो नहीं उठा पाए. 

Pradeep
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5. प्रवीण कुमार

स्विंग किंग के नाम से प्रवीण को सबसे पहले पहचान मिली. इस खिलाड़ी ने अपने करियर में शानदार गेंदबाज़ी की, लेकिन अपने स्वभाव के कारण और गिरती परफ़ॉरमेंस के कारण इन्हें भी टीम से बाहर कर दिया गया था.

Praveen
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7. डोडा गणेश

सिर्फ एक वनडे खेले इस गेंदबाज़ के चर्चे भारतीय क्रिकेट सर्किट में 90 के दशक में ज़ोरो से थे. इस खिलाड़ी को हर कोई नीली जर्सी में देखना चाहता था. वो दौर आया भी लेकिन गणेश की परफ़ॉर्मेंस इंटरनेशनल लेवल की नहीं थी. इसके बाद उन्हें चार और टेस्ट मे मौक़ा मिला लेकिन वहां भी फ़ेल होने के बाद उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

Doda ganesh
Source: Indiantoday

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